सन 1998 में जीवदया एवं मानवसेवा की भावना और सेवाभाव के संकल्प के साथ ' मातृछाया ' जैन महिला संगठन की स्थापना हुई। सीमित संसाधनों से प्रारंभ हुआ यह संगठन आज सेवा, परमार्थ एवं सामाजिक सरोकारों की सशक्त धरोहर बन चुका है। संगठन द्वारा मानवसेवा, जीवदया, साधर्मिक भक्ति, देवद्रव्य, गुरु भगवंतों की वैयावच्च, अनाथ आश्रम एवं गोशालाओं में सहयोग सहित 7 क्षेत्रों में सेवा कार्य निरंतर किए जाते हैं।


जहाँ सेवा भावना, वहाँ मातृछाया
संगठन द्वारा जरूरतमंदों की सहायता के साथ स्वास्थ्य जांच, नेत्र परीक्षण एवं चिकित्सा, डायलिसिस, कृत्रिम पैर प्रत्यारोपण तथा कैंसर जांच जैसे विभिन्न निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाता है। साधर्मिक परिवारों की आर्थिक सशक्तता एवं आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संगठन द्वारा निःशुल्क शॉपिंग एग्जीबिशन का आयोजन किया जाता है, जिसमें उन्हें अपनी प्रतिभा, उत्पाद एवं व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है। समाज में छिपी प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने एवं उनकी कला को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संगठन द्वारा ‘Jain Voice of Bengaluru’ के दो सफल संस्करणों का आयोजन भी किया जा चुका है।
हमारी सेवा देखेंजीवदया
पशु-पक्षियों की सेवा, गौशाला सहयोग, पशु चिकित्सा एवं जीव संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास।
मानवसेवा
जरूरतमंदों की सहायता, स्वास्थ्य सेवा, आर्थिक सहयोग एवं सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर प्रयास।
साधर्मिक भक्ति
साधर्मिक परिवारों की सहायता, आत्मनिर्भरता एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास।
देवद्रव्य एवं वैयावच्च
जिनशासन की सेवा, धार्मिक कार्यों में सहयोग एवं साधु-साध्वी भगवंतों की वैयावच्च के लिए निरंतर समर्पण।
महिला सशक्तिकरण
महिलाओं की प्रतिभा, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने के अवसर।
छात्रवृत्ति
जरूरतमंद एवं प्रतिभावान विद्यार्थियों को शिक्षा हेतु आर्थिक सहयोग एवं प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास।
छोटे प्रयास, बड़ा परिवर्तन
सेवा से स्वास्थ्य, शिक्षा से स्वावलंबन, निस्वार्थ भाव से करुणा की छाया
पशु सेवा एवं जीवदया में समर्पित योगदान
श्री महावीर जैन पशु सेवा केंद्र, नेल्लोर में पशुसेवा एवं जीवदया के उद्देश्य से संगठन द्वारा लगभग 40 लाख रुपये का सहयोग प्रदान किया गया। इस राशि से चारे के भंडारण हेतु गोदाम, पशुओं के लिए विशाल पेयजल टैंक तथा प्रसूति गायों के लिए पृथक शेड का निर्माण कराया गया, जिससे पशुओं के लिए बेहतर एवं सुरक्षित व्यवस्थाएँ सुनिश्चित हो सकीं।
मंदबुद्धि आश्रम के लिए मानवीय संवेदना
जालोर जिले के आहोर क्षेत्र स्थित मंदबुद्धि आश्रम के सेवा कार्यों में संगठन निरंतर सहयोग प्रदान करता रहा है। लगभग 7 वर्षों के दौरान 30 लाख रुपये का सहयोग देकर आश्रम में रहने वाले विशेष जरूरतों वाले लोगों की देखभाल एवं आवश्यकताओं में योगदान दिया गया है।
डायलिसिस सेवा में निरंतर सहयोग
मानवसेवा के क्षेत्र में संगठन द्वारा जरूरतमंद मरीजों को स्वास्थ्य संबंधी सहायता प्रदान करने का निरंतर प्रयास किया जाता रहा है। संगठन की स्थापना से अब तक जरूरतमंद लोगों की किडनी डायलिसिस सेवा के लिए 40 लाख रुपये से अधिक का आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा चुका है।
गौतीर्थ में जीव रक्षा हेतु विशाल शेड निर्माण
रामसमुद्रा बांध के समीप, शिडलघट्टा तालुक, चिक्कबल्लापुर में विश्व प्राणी कल्याण मंडल के संस्थापक श्री दयानंदस्वामीजी द्वारा स्थापित गौतीर्थ – श्री भगवान महावीर जीव रक्षा धाम में संगठन द्वारा 150 फीट × 36 फीट, कुल 4,500 वर्गफीट क्षेत्रफल का विशाल शेड निर्माण कराया गया है। यह पहल जीवदया एवं पशु संरक्षण के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।
पहचान – Season 7
श्री मातृछाया द्वारा आयोजित विशेष शॉपिंग एग्जीबिशन — नारी शक्ति, आत्मनिर्भरता, उद्यमिता एवं प्रतिभा को समर्पित।
Hotel Trishla Residency, Sajjan Rao Road, V.V. Puram, Bengaluru.









निःशुल्क ऑर्थोपेडिक शिविर गोडवाड़ भवन में
रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट कैम्प का आयोजन गोडवाड़ भवन में किया गया। उद्घाटन मुख्य अतिथि ललिताजी सिंघवी, डॉ. नरपतजी सोलंकी, सरिताजी रांका ने दीप प्रज्वलन कर किया। अध्यक्ष ललिताजी नागोरी ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि शिविर में रोबोटिक समर्थित जॉइंट रिप्लेसमेंट और उससे जुड़ी आधुनिक चिकित्सा जानकारी पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया जाएगा। मार्गदर्शिका त्रिशलाजी कोठारी ने बताया कि यह शिविर उन लोगों के लिए है जिनमें घुटना, कूल्हा या कंधे के जोड़ों में दर्द, अकड़न या चलने-फिरने में कठिनाई हो रही है उनको मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। अहमदाबाद के जैन नी एंड हिप क्लिनिक के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. जीतेंद्रजी चौधरी जैन ने जानकारी दी कि रोबोटिक एडेड जॉइंट रिप्लेसमेंट में हड्डियों की कटाई, श्री मातृछाया जैन महिला संगठन की ओर से निःशुल्क संभावना रहती है। सचिव रेशमाजी बडोला ने बताया कि शिविर में 300 से अधिक लोगों ने जांच करवाई।

3000 से अधिक जल कुंडियों का वितरण
प्यासे प्राणी की प्यास बुझाना, सबसे बड़ा पुण्य कहलाता है। भीषण गर्मी में जहाँ इंसान ही नहीं बल्कि पशु-पक्षी भी जल के अभाव में अत्यंत कष्ट झेल रहे हैं, ऐसे समय में श्री मातृछाया जैन महिला संगठन, बेंगलूरु द्वारा जीवदया एवं सेवा का एक अत्यंत सराहनीय अभियान चलाया जा रहा है। संगठन ने आंध्रप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पशु-पक्षियों एवं अबोध जीवों के लिए लगभग 1800 से अधिक बड़ी जल कुंडियों का वितरण कर एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह सेवा कार्य ईस्ट एवं वेस्ट गोदावरी क्षेत्र के अंतर्गत कोव्वुर, काकीनाडा, राजमहेंद्रवरम (राजमुंदरी), विशाखापट्टनम, अमलापुरम, सामालकोटा, भीमवरम, पालकोल, तनुकु, निर्दोल आदि स्थानों के साथ ही कई ऐसे जंगल एवं दुर्गम क्षेत्रों में भी बड़ी-बड़ी जल कुंडियाँ रखवाई गईं जहाँ सामान्यतः लोगों का पहुँचना कठिन होता है, वहाँ रहने वाले पशु-पक्षियों को भी इस भीषण गर्मी में जल मिल सके। इस अभियान में श्री सुमतिनाथजी जीवदया ग्रुप, राजमंद्री के विशेष सहयोग एवं योगदान के लिए श्री मातृछाया जैन महिला संगठन ने आभार व्यक्त किया।

मानव सेवा एवं जीवदया के उल्लेखनीय कार्य
मातृछाया ने पर्युषण महापर्व में उल्लेखनीय मानव सेवा, जीवदया एवं साधर्मिक भक्ति के कार्य किये। सज्जनराव सर्कल के समीप संगठन द्वारा 200 जरूरतमंद लोगों को भोजन वितरित किया गया। समाज के जरूरतमंद परिवारों को राशन सामग्री एवं आर्थिक सहयोग प्रदान कर साधर्मिक भक्ति की गई। किदवई हॉस्पिटल में 400 जरूरतमंद मरीजों को फल, ड्राई फ्रूट्स एवं आवश्यक सामग्री वितरित की गई। संगठन के सदस्याओं ने नेल्लूर गौशाला में जाकर गायों को चारा खिलाया एवं गौशाला को विशाल धन राशि का भी सहयोग किया। ऋषभ कामधेनु गौशाला में जाकर गायों को चारा खिलाया एवं गौशाला को विशाल धन राशि का भी सहयोग किया। कर्नाटका वेलफेयर एसोसिएशन फहर द ब्लाइंड में करीब 50 बच्चों के लिए राशन सामग्री एवं उनके संस्था को धन राशि का भी सहयोग किया। मनोविकास सेवा केंद्र में 25 लीटर दूध के साथ राशन सामग्री, ड्राई फ्रूट्स, चॉकलेट्स एवं डायपर्स प्रदान किये। आहोर राजस्थान के जागृति जन सेवा संस्थान मंदबुद्धि आश्रम में बच्चों को तीनों समय भोजन कराया।
एक सेवा प्रयास, किसी के लिए नई आशा
धन का सर्वोत्तम उपयोग वही है, जो किसी जरूरतमंद के जीवन में सुख, राहत और आशा लेकर आए। आइए, अपनी कमाई का एक अंश सेवा एवं परोपकार के इस पावन कार्य में समर्पित कर पुण्योपार्जन का अवसर प्राप्त करें। आपका छोटा-सा सहयोग भी किसी जरूरतमंद के लिए बड़ी सहायता बन सकता है। मातृछाया के सेवा कार्यों में यथाशक्ति आर्थिक सहयोग प्रदान कर इस पुण्य यात्रा के सहभागी बनें।
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